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Rahat Indori

राहत इन्दोरी | अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे !!!!

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अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​, ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​, अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे। Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai Zamane Mere, Fir Bhi MashHoor Hain Shaharon Mein Fasane Mere, …

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जवानी का मोड़…

  लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं, इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं, मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ, रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं, नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से, ख्वाब आ आ के …

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