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सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

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सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उस में एक बीज वह खो न गया, मिट्टी न बना कोदों, सरसों से शुद्र चीज! उस छोटे उर में छुपे हुए हैं डाल–पात औ’ स्कन्ध–मूल गहरी हरीतिमा की संसृति बहु रूप–रंग, फल और फूल! वह है मुट्ठी …

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मैं सबसे छोटी होऊं – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

मैं सबसे छोटी होऊँ तेरी गोदी में सोऊँ तेरा आँचल पकड़-पकड़कर फिरू सदा माँ तेरे साथ कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ बड़ा बनाकर पहले हमको तू पीछे छलती है माँ हाथ पकड़ फिर सदा हमारे साथ नहीं फिरती दिन-रात अपने कर से खिला, धुला मुख धूल पोंछ, सज्जित कर गात …

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15 अगस्त 1947 – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

15 August 1947 – Sumitranandan Pant

15 August 1947 By Sumitranandan Pant 15 अगस्त 1947 – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) चिर प्रणम्य यह पुष्य अहन, जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नव भारत, फिर चीर युगों का तिमिर-आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परिदीप्त कर भुवन! सभ्य हुआ अब विश्व, सभ्य धरणी का …

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ये सुन्दर कविता.. हर रिश्ते के लिए

ये सुन्दर कविता.. हर रिश्ते के लिए मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन! आज दरार है, कल खाई होगी फिर भरेगा कौन! मैं चुप, तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन! बात छोटी को लगा लोगे दिल से, तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन! दुखी मैं …

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Ek Pal Mein Jo Aakar Gujar Jaaye

Ek pal mein jo aakar gujar jaaye Yeh hawa ka woh jhoka hai ..aur kuch nahi Pyar kahti hai duniya jise, Ek rangeen dhokha hai .. aur kuch nahi Bollywood Movie: Diljale

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