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Why Do We Celebrate Navratri ? Hum Navratri Kyu Manate Hai ?

हम नवरात्र क्यों मनाते है

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नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है,एक साल में दो बार नवरात्री होती है जो चैत्र और कुम्हार माह में मनाया जाता है इसका अभिप्राय मौसम के बदलाव के साथ भी है। कुम्हार माह के नवरात्र प्रकृति में  सर्दियों के मौसम की शुरुआत करते है जब की चैत्र माह के नवरात्र गर्मी के मौसम की शुरुआत करते है| भारतीय चंद्र कैलेंडर माह में अश्विन माह के बढ़ते चंद्र चरण की शुरूआत की तारीख है, जब नवरात्रि उपवास और अन्य रीति-रिवाज/उत्सव शुरू होते है।

Happy Navratri 2018, Why do we celebrate navratri

त्योहार के पीछे की कहानी यह है कि देवी दुर्गा ने इन नौ दिनों के दौरान दानव महिषासुर के साथ लड़ाई के बाद उसका वध किया। नवरात्रि उपवास के हवन या आग अनुष्ठान में जिसमें देवता को मंत्रो के साथ चढ़ावा चढ़ाया जाता है,इसके साथ ही नवरात्र  नौवें दिन में समाप्त होता है। आम तौर पर एक मूर्ति की नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान पूजा की जाती है और यह दसवें दिन उसका विसर्जन किया जाता है, जो विजय दशमी या दशहरे के रूप में मनाया जाता है |

देवी दुर्गा या शक्ति ज्ञान, समृद्धि, और ईश्वर की अनुकंपा के लिए मानी जाती है। नवरात्रि के दौरान उपवास की परंपरा भी आयुर्वेद से जुड़ी है। यह माना जाता है कि इस अवधि के दौरान उपवास करना अधिक स्वास्थ्य लाभ देता है |

नवरात्रि का अर्थ नौ देवियों के रूप

नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’ इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान,देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं।। दुर्गा का मतलब जीवन के दुख कॊ हटानेवाली होता है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है|

दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रमुख त्यौहार है| नवरात्रि भारत के विभिन्न भागों में अलग ढंग से मनायी जाती है। गुजरात में इस त्योहार को बड़े पैमाने से मनाया जाता है। गुजरात में नवरात्रि समारोह डांडिया और गरबा के रूप में जान पड़ता है। यह पूरी रात भर चलता है। डांडिया का अनुभव बड़ा ही असाधारण है। देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, ‘आरती’ से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद। पश्चिम बंगाल के राज्य में बंगालियों के मुख्य त्यौहारो में दुर्गा पूजा बंगाली कैलेंडर में, सबसे अलंकृत रूप में उभरा है।

नौ देवियाँ है

  • शैलपुत्री – इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।
  • ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।
  • चंद्रघंटा – इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।
  • कूष्माण्डा – इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।
  • स्कंदमाता – इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।
  • कात्यायनी – इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।
  • कालरात्रि – इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।
  • महागौरी – इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।
  • सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

नव दिन पश्चात दसवे दिन रावण का जलना

नवरात्री आरम्भ होने पर सभी लोग नव दिन विधि -विधान ,सच्चे मन से पूजा, भजन कीर्तन करते है सभी के घरो में नव दिन धूम मची रहती है|शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है।

सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है।

माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। दसवे दिन माता की प्रतिमा का विसर्जन करके सांयकाल में रावण का पुतला जलाया जाता है और मेला लगता है इस तरह नवरात्रि के नौ दिन की समाप्ति होती है |

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