Dard Shayari Hindi Urdu Ghazals Rahat Indori Sher Shayari (शेर शायरी)

राहत इन्दोरी | अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे !!!!

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​, ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​, अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।...

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जवानी का मोड़…

  लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं, इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं, मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ, रोशनी वाले मेरे नाम...

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